जर्मनी: सर्वोच्‍च अदालत ने डीज़ल कारों पर बैन पक्ष में दिया फैसला

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Delhi :- जर्मनी यानी आधुनिक ऑटोमोबाइल के जन्मस्थान पर डीज़ल कारों का बैन पूरी कार इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव हो साबित हो सकता है.

  • जर्मनी की एक बड़ी अदालत ने मंगलवार को अहम शहरों में प्रदूषण फैलाने वाली डीज़ल गाडि़यों को बैन करने के पक्ष में अपना फैसला दिया. इस पहल से जर्मनी की 12 मिलियन की गाड़ियों को नुकसान होगा और कार निर्माताओं को इन बदलावों की भारी कीमत चुकानी होगी.
  • साल 2015 में वॉक्‍सवेगन के अमेरिकी एग्‍जॉस्‍ट टेस्‍ट में गड़बड़ी करने की बात मानने के बाद से डीजल गाडि़यां निशाने पर हैं. एग्‍जॉस्‍ट टेस्‍ट सांस की बीमारियों के कारक पर्टीकुलेट मैटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड को सीमित करने के लिए बेहद ज़रूरी है. वॉक्‍सवेगन मामले के बाद से डीज़ल इंजन कारों के बैन के सुझाव को समर्थन मिल रहा है.
  • दूसरे देश भी डीज़ल कार के के बैन को समर्थन दे रहे है ऐसे में आधुनिक ऑटोमोबाइल के जन्मस्थान जर्मनी में डीज़ल कारों पर बैन पूरी कार इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. साथ ही ऐसे प्रतिबंधों का विरोध कर रही चांसलर एंजेला मर्केल सरकार के लिए भी शर्मनाक स्थिति खड़ी हो सकती है.
  • कार इंडस्ट्री से मर्केल सरकार के प्रतिबंध की वजह से ही सरकार इस बैन के विरोध में है. इस बैन के बाद ड्राइवर्स का गुस्सा और शहर में ट्रैफिक अव्यवस्था की नजह बन सकती है.
  • जर्मनी के स्‍टुटगार्ट और डसेलडॉर्फ में हवा की खराब गुणवत्‍ता के बाद स्‍थानीय अदालतों ने डीजल गा‍डि़यों पर प्रतिबंध लगा दिया थ. इसके खिलाफ राज्‍यों ने देश की सर्वोच्‍च अदालत में अपील की थी. लेकिन वहां से भी उन्‍हें झटका लगा. मर्केल सरकार कार उद्योग से करीबी के चलते निशाने पर है. उसने प्रतिबंध के खिलाफ पैरवी की है. उसे लाखों ड्राइवरों का गुस्‍सा झेलने और शहरों का यातायात बिगड़ने का डर है क्‍योंकि सार्वजनिक यातायात सही हालत में नहीं है.

 

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