महिला दिवस पर दिखाई फिल्म “ज्योति-ए लाइट ऑफ होप‘‘

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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गुरूवार को यहॉ राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम और आईटीआई के तहत चलाये जा रहे सभी कौशल विकास केंद्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं एवं युवतियों को एक विशेष फिल्म ‘‘ज्योति-ए लाइट ऑफ होप‘‘ दिखायी गयी ।

यह फिल्म आरएसएलडीसी के ट्रेनिग पार्टर, सिनर्जी प्रशांत कौशल द्वारा रोशनी प्रोडक्शन के सहयोग से बनाई गई है जो कि महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण में विशेष रूप से जागरूक करने और इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ महिलाओं को जोड़ने व चुनौतियों का सामना करने पर जोर देती है। इस 30 मिनट की लघु अवधि फिल्म को दिसंबर 2017 में मुंबई में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान सामाजिक गतिविधियोेंं के लिए सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का अवार्ड मिला है । तथा अन्य 3 फिल्म समारोहों के लिए भी नामांकित किया गया है।

इस अवसर पर कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग के आयुक्त तथा विशेष सचिव श्री ष्ण कुणाल ने कहा, “आरएसएलडीसी शुरूआत से ही उन पहलुओंं को लागू करने हेतु प्रयासरत है, जो महिलाओं में कौशल नियोजन को बढ़ावा देने और आजीविका के अवसरों में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें है। महिलाओं, युवाओं, विशेष योग्जन और जेल कैदियों ं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग की आरएसटीपी (नियमित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम) योजना को 2015 में नवीन रूप दिया गया था। इस योजना के तहत महिलाओं को 10 वर्ष तक की छूट प्रदान कर आयु सीमा 15-45 वर्ष कर दी गई हैं। इसी के साथ महिलाओं हेतु समर्पित कई कौशल प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किए गए हैं। राजस्थान सरकार ने राज्य में आईटीआई मेंं महिला उम्मीदवारों के नामांकन को प्रोत्साहन देने हेतु विभिन्न सीटीएस/एटीएस पाठ्यक्रमों में महिलाओं के लिए पूर्ण फीस की छूट प्रदान की गई है। राज्य में सभी आईटीआई में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान है। ‘‘

श्री कुणाल ने कहा विभाग द्वारा महिलाओं से संबधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कई ट्रेड व पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। कनवर्जेन्स मडल के तहत, महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं, इसके तहत किए जाने वाले कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 0.92 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। डीडीयू-जीकेवाई (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना) योजना में महिलाओं के लिये 33 प्रतिशत विशेष रिजर्व प्रदान किया गया है। महिला प्रशिक्षणार्थियों के कवरेज को बढ़ाने के लिए महिलाओं की ऊपरी आयु सीमा को संशोधित कर 35 से 45 साल कर दिया है। अन्य जिलों से प्रशिक्षण प्राप्त करने आ रहे युवाओं तथा युवतियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर (एमएससी) की स्थापना की गई है तथा आरएसटीपी योजना के अंतर्गत महिलाओं में स्किलिंग को बढ़ावा देने के लिए सभी महिला ट्रेनीजं को टूल किट भी वितरित किये जा रहे हैं। प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के माध्यम से महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह वित्तीय सहायता सभी योजनाओं के अंतर्गत महिला कौशल विकास केंद्रों एवं महिलाओं मेेंं सूक्ष्म लघु उद्यमों की स्थापना के प्रोत्साहन हेतु प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री कौशल ऋण योजना के अन्तर्गत कौशल प्रशिक्षण में महिला भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, अतिरिक्त 2 प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी भी (6 प्रतिशत) प्रदान की जा रही है।“

‘‘कौशल प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक क्लस्टर में 400 से अधिक कौशल सखी नियुक्त की गयी है जो अधिक से अधिक युवतियों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ रही हैं। इन्हीं सब पहल के परिणामस्वरूप, राजस्थान में विभिन्न स्किलिंग कार्यक्रमों के तहत विभाग द्वारा दिसंबर, 2017 तक 41,000 से अधिक महिलाएं प्रशिक्षित की जा चुकी हैं, जबकि 4,500 से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं ‘‘ श्री कुणाल ने आगे बताते हुए कहा।“

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, डीएसईई द्वारा ट्रेनिंग पार्टनर सिनर्जी के सहयोग से राजस्थान के जयपुर जिले से झुंझुंनु जिले तक महिलाओं में कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिये विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया ,जिसमें 12 बाइक सवार महिलाओं ने भाग लिया तथा जयपुर से झुंझुंनु का सफर तय किया। विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिये बाईकर्स ने झुंझुंनु के विभिन्न कौशल विकास केंद्रों एवं आईटीआई से जुड़े छात्रों से बातचीत की तथा उन्हें कौशल विकास में जमकर भागीदारी करने हेतु प्रोत्साहित किया।

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