शिक्षा की गुणवत्ता को हम प्राथमिकता देते है :- प्रो. वासुदेव देवनानी

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 शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने आज विधानसभा में कहा कि हम शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते है। और इस पर हमने धरातलीय कार्य भी किया है। इसका छोटा सा उदाहरण की पिछली सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में रमसा और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ 288 करोड़ रूपए खर्च किए थे। जबकि हमारी वर्तमान सरकार ने अभी तक के चार साल के कार्यकाल में इस पर 1 हजार 600 करोड़ से अधिक खर्च कर चुकी है।  यदि इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर भी शामिल कर लिया जाए, तो यह राशि 2 हजार 898 करोड़ रुपए हो जाती है।

शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि शिक्षा का अधिकार के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों में अध्ययन के अवसर मिलने से काफी संख्या में आवेदन मिलने लगे हैं। प्रो. देवनानी ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नामांकन में 12 लाख की बढ़ोतरी हुई है और परीक्षा परिणाम भी बेहतर हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां गार्गी पुरस्कार प्राप्त करने वाली बालिकाओं की संख्या 20 से 25 हजार होती थी, वह अब बढ़कर 1 लाख 26 हजार तक पहुंच गई है।

शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि दूर दराज के गांव-ढाणियों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। साथ ही पीपीपी मोड के बारे में उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी क्षेत्र के संचालन हेतु अभी तक कोई राजकीय विद्यालय पीपीपी मोड पर नहीं दिया गया है।

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